आज़ादी के बाद,
हमारे हाथ,
आई देश की कमान,
पंचवर्षीय योजनायें बनी,
पर विकास हुआ बहुत कम,
इसका मूल कारण है यही,
भ्रष्टाचार, मिलावट और जमाखोरी.
यह देश उन्नति में बाधक है,
समाज के लिए घातक है,
हर व्यक्ति की हानि होती है,
विश्वास टूटता है,
अच्छाई ख़तम होती है.
हमें इस भष्टाचार के वृक्ष को,
समाज से उखाड़ फेकना है,
अच्छे सिद्धांत अपनाकर,
स्वच्छ समाज का निर्माण करना है.
हमारे हाथ,
आई देश की कमान,
पंचवर्षीय योजनायें बनी,
पर विकास हुआ बहुत कम,
इसका मूल कारण है यही,
भ्रष्टाचार, मिलावट और जमाखोरी.
यह देश उन्नति में बाधक है,
समाज के लिए घातक है,
हर व्यक्ति की हानि होती है,
विश्वास टूटता है,
अच्छाई ख़तम होती है.
हमें इस भष्टाचार के वृक्ष को,
समाज से उखाड़ फेकना है,
अच्छे सिद्धांत अपनाकर,
स्वच्छ समाज का निर्माण करना है.
बहुत सकारात्मक दिस्त्रिकोण है|
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